Friday, August 29, 2025
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यहां तो क़ायम है दीया तले अंधेरा, शहर में  अतिक्रमण का वीभत्स स्वरूप

रायगढ़। कई दशकों के बाद रायगढ़ शहर में अतिक्रमण के ख़िलाफ़ निगम प्रशासन द्वारा गंभीरता से संज्ञान लिया जा रहा है और ये बहुत ज़रूरी भी हो गया क्योंकि नाली नालों फुटपाथ के ऊपर हो रहा अनियंत्रित अतिक्रमण शहर की व्यवस्था के लिए नासूर बनता जा रहा है। पूरी तरह तो नहीं पर काफी हद तक शहर को अतिक्रमण मुक्त करने की उम्मीदें मौजूदा निगम कमिश्नर से बढ़ी हैं, उम्मीद तो ये भी है कि शुरूआती प्वाईंट से अंतिम छोर तक नाले को अतिक्रमणमुक्त कराकर पैठू डबरी की दशकों पुरानी बरसाती जलभराव की समस्या को इसी साल समूल ख़त्म किया जायेगा। शहर का मुख्य बाज़ार बुरी तरह से सुनियोजित अतिक्रमण की चपेट में है, जिसके रिमूवल के लिए बरसात के बाद ही सही पूरी प्लानिंग के साथ काम होगा।

वहीं अतिक्रमण विरोधी मौजूदा मुहिम का दूसरा पक्ष ये भी सामने आता है कि नगर निगम कार्यालय भवन परिसर ही सुनियोजित तौर पर बेख़ौफ़ किये गये अतिक्रमण की चपेट में है, शायद इस तरफ़ कमिश्नर साहब का आना नहीं हो पाता है। एक बार इधर भी नज़रें ईनायत कीजिये सर, हो सकता है इस अतिक्रमण को बचाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के सामूहिक दबाव का सामना करना पड़े, लेकिन कार्रवाई की ज़द में ग़रीब गुरबा लोग आ रहे हैं तो ऐसी मोटी चमड़ी वालों पर लगाम क्यों नहीं कसी जा सकती।

ने इससे पहले कई बार गौरीशंकर मंदिर मोड़ न्यू मार्केट में बर्तन व्यावसायी द्वारा नाली के ऊपर किये गये अतिक्रमण को लेकर ध्यानाकर्षण की कोशिश की क्योंकि इस बर्तन दुकान का नाली के ऊपर होना निगम प्रशासन पर ही सवाल खड़ा करता है, ये अतिक्रमण भी तत्काल प्रभाव से हटना चाहिए। पंडित किशोरीमोहन त्रिपाठी शासकीय महिला महाविद्यालय, KMT गर्ल्स कॉलेज के खेल मैदान की ज़मीन पर श्याम टॉकीज़ रोड के पांच दुकानदारों ने अतिरिक्त निर्माण के लिए अतिक्रमण किया था, इस मामले की शिक़ायत गर्ल्स कॉलेज प्रबंधन द्वारा लिखित में की गई थी, जिसके आधार पर जांच हुई, जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद साईट से सामान की ज़ब्ती भी हुई, मगर निगम प्रशासन ने संदेहजनक परिस्थितियां पैदा करते हुए इस अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की, ऐसे में निगम प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी मुहिम को फ़ेयर कैसे माना जा सकेगा, आम जनता कैसे संतुष्ट होगी, निगम प्रशासन उन ग़रीबों का भरोसा कैसे जीत पायेगा जिन्होंने अपना कब्ज़ा तुड़वाया है या उनका कब्ज़ा अतिक्रमण के नाम पर दबावपूर्वक तोड़ा गया है।

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