रायगढ़ । जिला चिकित्सालय परिसर में संचालित रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा रामनिवास टॉकीज़ की तरफ़ अस्पताल की बाऊंड्री से लगकर 11 दुकानों का संचालन किया जा रहा है, इन दुकानों को प्रीमियम के आधार पर जिन्हें अलॉट किया गया था, वो इन दुकानों में कई सालों से अपने व्यापार का संचालन कर रहे हैं। वर्ष 2014-15 के दौरान जब डॉ यशवंत शिंदे जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक थे तब रेडक्रॉस के कायाकल्प की अनुमति किरायेदारों को दी गई थी, सब दुकानदारों ने अपने अपने हिसाब से दुकानों को डबल डेकर बना दिया, आज इन दुकानों को लाखों का प्रीमियम देकर लेने के लिए कोई भी बिजनेसमैन आसानी से तैयार हो जायेगा। वैसे मौजूदा रेडक्रॉस सोसायटी की तरफ़ से सभी 11 दुकानदारों को दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम दिया जा चुका है क्योंकि ज़्यादातर दुकानदारों ने सालों से ना तो किराया जमा किया है और ना ही किराया नवीनीकरण हुआ है। रेडक्रॉस सोसायटी से मिले नोटिस को दुकानदारों ने हाईकोर्ट में चैलेंज किया था, जहां से उन्हें फ़िलहाल राहत मिल चुकी है। ये तो हुआ पूरे मामले का एक पक्ष…
दूसरा पक्ष ये निकलकर आ रहा है कि रेडक्रॉस सोसायटी लाल, किसने और किन शर्तों पर अनुमति दी। उसके मुताबिक़ 2015 से पहले मुंशीराम ट्रस्ट द्वारा रामनिवास टॉकीज़ चौक के पास धर्मशाला भवन संचालित किया जाता था जहां मंदिर और कुआं के अलावा लोगों के ठहरने के लिए एक हॉल भी था, जिसका मैनेजमेंट श्रृंगार सदन वाले भी करते थे। अब मुंशीराम ट्रस्ट की धर्मशाला का अस्तित्व ख़त्म हो गया है वहां सिर्फ़ एक मंदिर ही अस्तित्व में बची है, जबकि बाकी ज़मीन में दुकानें बनाकर ट्रस्ट की संपत्ति पर व्यवसाय शुरू कर दिया गया, अब इसमें सही ग़लत का पता तो पुराने राजस्व अभिलेखों के गहन अध्ययन से ही चल पायेगा। बहरहाल रेडक्रॉस की 11 दुकानों के बाद बाक़ी बची चार दुकानों को लेकर क्या स्थितियां बनेंगी, ये जानने के लिए थोड़ा इंतज़ार तो बनता है।