रायगढ़ । इस बार कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट कहा है कि किसी भी जिले में अध्यक्ष पैराशूट लैंडिंग नहीं यानी उच्च नेताओं के इशारे पर नहीं बनाए जाएंगे इसलिए हर जिले के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया है जो ब्लाक स्तर पर जा कर एक एक कार्यकर्ताओं से सलाह ले कर रिपोर्ट आला कमान को सौंपेंगे उसके बाद इसी रिपोर्ट के आधार पर ही अध्यक्ष का चयन किया जाएगा।
इसलिए रायगढ़ जिला कांग्रेस अध्यक्ष के लिए लाम्बा जी को प्रभारी बनाया गया है और वे प्रभारी स्वयं ब्लाक स्तर पर पहुंच कर कार्यकर्ताओं से सलाह ले रहे है लेकिन कार्यकर्ता भी गुटबाजी के कारण खुलकर बोल पाने में अपने आपको असमर्थ पा रहे है। क्योंकि लगभग हर गुट के नेताओं की मौजूदगी आसपास देखी जाती है रायगढ़ जिला कांग्रेस अध्यक्ष ग्रामीण के लिए अब तक 12 प्रत्याशी मैदान में है और हर प्रत्याशी को यह उम्मीद है कि इस बार वही अध्यक्ष बनेगा।
सूत्रों की माने तो रायगढ़ जिले में प्रदेश के कुछ दमदार नेताओं के चहेते भी है तो कुछ रायगढ़ जिले के खरसिया विधायक एवं पूर्व मंत्री के गुट के माने जा रहे है। लेकिन इन सबमें अध्यक्ष पद के लिए 3 प्रत्याशी ही दमदार माने जा रहे है जिसमें नगेंद्र नेगी और विकास शर्मा पूर्व मंत्री उमेश पटेल गुट के बताए जा रहे है नगेंद्र नेगी पहले भी ग्रामीण जिलाध्यक्ष बनाए गए थे और इनके कार्यकाल को रायगढ़ के कार्यकर्ता भलीभांति देख चुके है और अब ऐसे में अगर इस बार भी अध्यक्ष बनाए जाते है तो इसका मतलब साफ है कि उमेश पटेल गुट हावी माना जाएगा। युवाओं की माने तो इस बार युवा चेहरे को ग्रामीण जिलाध्यक्ष बनाने की मांग दबी जुबान से की जा रही है।
विकास शर्मा कापू क्षेत्र के दमदार नेता माने जाते है और इनकी पकड़ धरमजयगढ़ क्षेत्र में अच्छी बताई जाती है, जिला पदाधिकारी भी रहे है ऐसे में अच्छा तजुर्बा भी है और उमेश पटेल के करीबी बताए जाते है।
और पुसौर क्षेत्र के दमदार नेता आकाश मिश्रा भी इस बार ग्रामीण जिलाध्यक्ष पद के लिए मैदान में है आकाश के बारे में जानकारों की माने तो ग्रामीण क्षेत्र से सरपंच, जनपद सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर निर्वाचित हुए थे इससे यह प्रतीत होता है कि आकाश मिश्रा ग्रामीण क्षेत्र के दमदार जनप्रतिनिधि है इसमें कोई संशय नहीं है। इस बार भी जिला पंचायत सदस्य के लिए अपनी किस्मत आजमाई लेकिन कांग्रेस के अंदर होने वाले गुटबाजी के कारण इस बार कुछ वोटो से हार का सामना करना पड़ा था।
बहरहाल अब देखना यह है कि सभी कार्यकर्ताओं की रायशुमारी के बाद कांग्रेस आला कमान क्या रिपोर्ट पहुंचती है और इस बार कांग्रेस जिलाध्यक्ष ग्रामीण का ताज किसके सर पर सजता है। शायद इस बार गुटबाजी से ऊपर उठकर ग्रामीण कार्यकर्ताओं की जरूरत के अनुसार उन्हें अध्यक्ष मिलता है या फिर किसी पावरफुल गुट के दबाव में आ कर अध्यक्ष को कार्यकर्ताओं के ऊपर थोप दिया जाएगा…?
