जिंदल स्टील, जेपीएल सहित एनटीपीसी लारा, बीएस स्पंज, सालासर, वेदांता एवं अन्य पर आरोपित हुई पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि
रायगढ़ ।उद्योगों के कच्चे माल, उत्पाद, अपशिष्ट और फ्लाई एश परिवहन के परिवहन में नियमों का उल्लंघन करने और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले औद्योगिक इकाईयों के खिलाफ जिले में पर्यावरण विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है. पिछले छह महीने के ही आंकड़ों पर गौर करें तो अक्टूबर तक ही स्थिति में दो दर्जन से अधिक उद्योगों पर 54 लाख 33 हजार रूपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित किया जा चुका है. जबकि यह कार्रवाई लगातार जारी है.
औद्योगिक जिला रायगढ़ में प्रदूषण की समस्या गंभीर होते जा रही है, औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम लगाने में प्रशासन काफ़ी हद तक कामयाबी हासिल कर चुका है मगर सड़क पर दौड़ते औद्योगिक वाहनों के चलते न सिर्फ वायु प्रदूषण हो रहा है साथ ही इससे पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है. यही कारण है छत्तीसगढ़ सरकार में पर्यावरण मंत्री की जिम्मेदारी सम्हालते ही रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने इसे काफ़ी गंभीरता से लिया और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई कड़े कदम उठाते हुए सख्त नियम भी बनाये हैं. जिसके बाद प्रदेश में रायगढ़ एकमात्र ऐसा जिला है जहां प्रदूषण को लेकर लगातार कार्रवाई हो रही है। पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा पहले से जो मानक संचालन प्रक्रिया जारी किये गए थे उसका उल्लंघन करने पर वाहनों से अब क्षतिपूर्ति वसूली जा रही है। पर्यावरण विभाग ने जुलाई 2024 में एक एसओपी जारी की थी जिसके अनुसार उद्योगों के कच्चे माल, उत्पाद, अपशिष्ट और फ्लाई एश परिवहन में नियम लागू किए गए थे। तारपोलिन कवर ठीक से नहीं होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें भी बदलाव किए गए और यह नियम बनाया गया कि किसी उद्योग द्वारा बार-बार उल्लंघन करने पर उसको सील तक किया जा सकता है। इस एसओपी के जारी होने के बाद पर्यावरण विभाग रायगढ़ की टीम लगातार इन नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर लगातार कार्रवाई कर रही है और उनपर भारी भरकम जुर्माना भी वसूल कर रही है. पिछले छह महीने के ही आंकड़ों को नजर डाले तो पता चलता है कि मई 2025 से लेकर अक्टूबर 2025 तक रॉ मटेरियल और सम्मति शर्तों के उल्लंघन और समय समय पर उद्योगों के निरीक्षण के दौरान दो दर्जन से अधिक उद्योगों पर 54 लाख 33 हजार रूपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है, इसमें 14 उद्योगों पर निरीक्षण के दौरान जहां 39 लाख 30 हजार रूपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि वसूल की गई है तो वहीं रॉ मटेरियल और सम्मति शर्तों के उल्लंघन पर भी दर्जनभर से अधिक उद्योगों पर 15 लाख से अधिक का अर्थदंड लगाया गया है. पिछले छह महीने के अंदर अब तक की हुई जांच और निरीक्षण सबसे ज्यादा जिंदल ग्रुप के जेएसपीएल पतरापाली, जेपीएल तमनार, गारे पेलमा 6, केराझर, डोंगामहुआ प्लांट के साथ गारे पेलमा 4 पर पांच बार कार्रवाई हो चुकी है तो वहीं मेसर्स सिंघल इंटरप्राइजेज, सालासर, सुनील इस्पात, वेदांता वासरी, संजय इंगार्ड, बीएस स्पंज, श्याम इस्पात, एनटीपीसी लारा, सारडा एनर्जी, मां मनी आयरन को भी पर्यावरण को भी क्षति पहुंचाने का दोषी पाया जा चुका है. विभाग की यह कार्रवाई लगातार जारी है,। जो भी वाहन एसओपी के विरुद्ध परिवहन करता पाया जाता है उस पर तुरंत पेनाल्टी लगाई जा रही है। वहीं अगर पूरे वित्तीय वर्ष में अब तक हुई कार्रवाई पर नजर डालें तो जिले भर में अब तक हुई जांच में बतौर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति उद्योगों पर 2 करोड़ 25 लाख से अधिक की राशि का जुर्माना किया जा चुका है.
