
एसडीएम न्यायालय से हो चुका है वास्तविक भूमिस्वामी का नाम दर्ज करने का आदेश
रायगढ़। पिछले कुछ सालों में रायगढ़ में जमीन की भूख सबसे ज्यादा बढ़ी है। कोई सरकारी जमीन को निजी बताकर बेच रहा है तो कोई दूसरे की जमीन पर दावा ठोक रहा है। राजस्व विभाग भी इस गुंताड़े को देखकर हैरान है क्योंकि इतना तेज दिमाग तो पटवारी-आरआई के पास भी नहीं है। कोतरा रोड चूना भट्ठे की करीब साढ़े चार एकड़ जमीन को हासिल करने के लिए एक परिवार ने फर्जी नामांतरण करवा लिया जबकि एसडीएम न्यायालय से वास्तविक भूमिस्वामी के पक्ष में आदेश हो चुका है। रायगढ़ में 60 करोड़ के जमीन घोटाले का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूरा मामला शहर के कोतरा रोड चूना भट्ठा की जमीन खसरा नपंबर 127/2 का है, जहां नटवर बेरीवाल और उनके परिवार ने फर्जी नामांतरण के जरिए सिंघानिया परिवार के नाम से दर्ज जमीन को अपने नाम कर लिया था। जबकि इस मामले में नजूल अधिकारी से लेकर एसडीएम और तहसील न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बेरीवाल परिवार द्वारा कराया गया नामांतरण पूरी तरह से फर्जी है।
न्यायालय ने भी जमीन के अभिलेखों से बेरीवाल परिवार का नाम काटकर सिंघानिया परिवार का नाम 1995-96 की स्थिति में दर्ज करने का आदेश पारित कर चुका है। यह मामला करीब 20 साल पुराना है। शहर के सिंघानिया परिवार की कोतरा रोड में खनं 127/2 रकबा 4.62 एकड़ पुस्तैनी जमीन है। उन्होंने मार्च 2012 में उक्त जमीन को रेड कारपेट बिल्डर को बेचने का सौदा किया लेकिन बिक्री नकल निकालते समय उनको पता चला कि 1995-96 की स्थिति में उनके खाते में कुल 3.32 एकड़ जमीन ही दर्ज है। 0.597 हे. जमीन नटवर बेरीवाल और उनके परिवार के नाम से दर्ज पाई गई। जबकि सिंघानिया परिवार का कहना है कि उनका बेरीवाल परिवार से कभी कोई किरायानामा या बिक्रीनामा हुआ ही नहीं है। तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने तत्कालीन नजूल अधिकारी एके धृतलहरे को जांच के आदेश दिए। नजूल अधिकारी, एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने सिंघानिया परिवार और बेरीवाल परिवार को जमीन संबंधी अपने-अपने दस्तावेज के साथ प्रस्तुत होने का नोटिस जारी किया। तहसीलदार ने जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट लिखा है कि सिंघानिया परिवार की जमीन के नामांतरण का कोई भी केस या रिकॉर्ड तहसील कार्यालय में नहीं है।एसडीएम ने भी तहसीलदार के आदेश को माना
एसडीएम ने भी तहसीलदार के प्रतिवेदन को उचित ठहराया। इस प्रकरण में सिंघानिया परिवार ने अपने संपूर्ण दस्तावेज समय से पहले ही नजूल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर दिए थे। जबकि नटवर बेरीवाल परिवार ने जमीन का कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। वे किसी पेशी में भी उपस्थित नहीं हुए। तत्कालीन नजूल अधिकारी ने भी कि नटवर बेरीवाल एंड परिवार द्वारा लगातार पेशी में बुलाए जाने पर भी उपस्थित नहीं हुए और न ही कोई कागजात प्रस्तुत किए। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा नामांतरण फर्जी रूप से दर्ज कराया गया है। नजूल अधिकारी ने नटवर बेरीवाल परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने के भी निर्देश दिए थे।
न्यायालय में लगाएं अर्जी
तहसीलदार, एसडीएम और नजूल अधिकारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने आदेश दिया कि उक्त जमीन के नामांतरण का कोई रिकॉर्ड शासकीय दस्तावेजों में नहीं है। अत: भूमि स्वामी सिंघानिया परिवार उचित न्यायालय में आवेदन कर अपनी जमीन को वापस पा सकता है। सिंघानिया परिवार ने एसडीएम न्यायालय में अपील की और जमीन अपने नाम दर्ज करने की मांग की, लेकिन दूसरे पक्ष ने केस को लंबित रखने और न्यायालय को गुमराह करने के लिए अनेक हथकंडे अपनाए। तत्कालीन एसडीएम भागवत जायसवाल ने अपने आदेश में बेरीवाल परिवार का नाम काटकर सिंघानिया परिवार का नाम जोडऩे के आदेश दिए और जमीन का रिकॉर्ड 1995-96 की स्थिति में करने के आदेश दिए। अब नटवर बेरीवाल एवं उनका परिवार इस मामले को राजस्व मंडल लेकर चला गया है। वहां भी अब तक वे कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। सिर्फ प्रकरण को लंबा खींचने की कोशिश की जा रही है।
