रायगढ़। आदिवासी विकास विभाग में चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के नियमितीकरण में नियम विरुद्ध काम किया गया। तत्कालीन सहायक आयुक्त ने चार कर्मचारियों के माध्यम से कारनामा कर दिया। इसमें राज्य शासन ने जांच के आदेश दिए थे लेकिन फाइल रुक गई थी। सरकार बदलते ही जांच आगे बढ़ी है। रायगढ़ से कुछ कर्मचारियों को बयान के लिए बुलाया गया है। आजाक विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पांचवीं के सर्टिफिकेट फर्जी होने की आशंका पर वेरीफिकेशन और ज्वाइनिंग रोक दी गई थी, लेकिन बाद में आए सहायक आयुक्त (वर्तमान में सस्पेंड) ने बिना वेरीफिकेशन के करीब 300 कर्मचारियों की ज्वाइनिंग करवा दी।इस मामले में संचालनालय ने जांच के आदेश दिए थे। इस बीच कई गड़बड़ी पाए जाने पर एसी को सस्पेंड कर दिया गया था। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करने का ऐलान किया है। इसलिए सरकार बदलते ही आजाक विभाग संचालनालय के अधिकारी एआर नवरंग को जांच आगे बढ़ाने को कहा गया है। रायगढ़ से कुछ कर्मचारियों को बयान देने रायपुर बुलाया गया है। उन कर्मचारियों में भी खलबली मच गई है जो किसी न किसी रूप में इस कांड में शामिल थे।तीन कर्मचारी सारंगढ़ गए, एक रिटायरआजाक विभाग रायगढ़ में चार कर्मचारियों के माध्यम से यह काम किया गया। इसमें से एक रिटायर हो चुके हैं जो शाखा प्रभारी थे। इसके बाद जिबिकेतन यादव, गोकुल सिदार और लक्ष्मी डनसेना की भूमिका भी इसमें बताई जा रही है। जांच का दायरे में ये भी हैं। जांच अधिकारी इनसे भी पूछताछ कर सकते हैं। इनमें से तीन को तो गलत तरीके से रायगढ़ में अटैच करके रखा गया था।
