समग्र शिक्षा विभाग के दो अन्य कर्मचारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप, प्रतिनियुक्ति के नियम विरुद्ध अब तक कुर्सी पर काबिज
रायगढ़, 4 सितंबर। समग्र शिक्षा विभाग में दो और कर्मचारी भी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए हैं। प्रतिनियुक्ति पर प्रतिनियुक्ति देने का चमत्कार करने वाले विभाग में कुछ भी हो सकता है। प्रबंध संचालक को की गई शिकायत में कहा गया है कि यहां 10 साल से पदस्थ एपीसी ने दिव्यांग बच्चों के लिए 50 लाख की सामग्री खरीदी है, लेकिन सामान कहां गया, किसी को पता नहीं। समग्र शिक्षा विभाग में चल रही मनमानी पर कई सालों से आंख मूंद ली गई है, जिसकी वजह से गड्ढा इतना बड़ा हो गया है, जिसे पाटना मुश्किल है। शिकायत होती भी है तो जांच के नाम पर महीनों घुमाया जाता है।फिर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। शिक्षकों की कमी होने के बावजूद समग्र शिक्षा में शिक्षकों को तैनात कर दिया गया है। यहां प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कुर्सी पर जम जाते हैं। स्कूलों में वापस जाकर पढ़ाने के डर से ये दफ्तर में ही रहने के लिए सेटिंग कर लेते हैं। प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा से हुई शिकायत में आरोप है कि एपीसी भूपेंद्र पटेल ने वर्ष 19-20 और 20-21 में दिव्यांग बच्चों के लिए सामग्री क्रय की गई थी। करीब 50 लाख की सामग्री क्रय की गई लेकिन सामान कहां गया पता नहीं चला। जिला स्तर पर ही सामान खरीदा गया था।भूपेंद्र पटेल दस साल से प्रतिनियुक्ति पर हैं जबकि अन्य विभाग में चार साल से अधिक प्रतिनियुक्ति नहीं मिलती। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों से प्रतिमाह कमीशन 5-10 प्रश मांगा जाता है। वहां के कर्मचारियों को हटा देने की धमकी देते रहते हैं। सहायक परियोजना समन्वयक के विरुद्ध भी गंभीर शिकायत हुई है।एक कर्मचारी पर गणवेश बेचने के आरोपसमग्र शिक्षा में पूर्व में पदस्थ रामकुमार चौहान के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आदिवासी विकास विभाग के कर्मचारी होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति पर यहां रहे। छात्रावास अधीक्षक रहने के दौरान भी हॉस्टल में अनियमितता करते थे। एपीसी रहते हुए भी चौहान ने अपने चहेते फर्म में गणवेश को बेचकर तीन लाख की कमाई की थी। एक बीआरसी राधेश्याम शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है। इनकी कार्यशैली गड़बड़ मिलने पर पूर्व कलेक्टर और डीईओ ने मूल शाला में वापस किया गया था। इन आरोपों की जांच के आदेश तो हुए लेकिन रिपोर्ट कहां दबी है किसी को नहीं मालूम।