Tuesday, January 20, 2026
Homeरायगढ़बिना अनुमति आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी ने खरीदी

बिना अनुमति आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी ने खरीदी

कर निर्धारण पर भी उठे सवाल, नजूल अधिकारी का आदेश भी सन्देहास्पद, राजपरिवार की जमीन पर आवासीय कॉलोनी

रायगढ़ । रायगढ़ राजपरिवार की जमीन पर बहुत जल्द आलीशान आवासीय कॉलोनी बनाई जाएगी। इसके लिए नियमों को ताक पर रखकर जमीनों के सौदे किए गए हैं। आदिवासी भूमि स्वामी से गैर आदिवासी ने जमीन खरीदी है। नजूल से कर निर्धारण नहीं हुआ है लेकिन इस जमीन के लिए कर दिया गया। तीन हिस्सों में बिकी जमीन के पीछे बड़ी गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है। राजपरिवार की संपत्ति के सौदे पहले ही विवादित रहे हैं। अब इससे जुड़ा एक और मामला सामने आया है। नजूल शीट नंबर 56 प्लॉट नंबर 165/3 की कुल 1,61,172 वर्गफुट में से तीन टुकड़ों की अलग-अलग रजिस्ट्रियां हुई हैं।विक्रेता विक्रम बहादुर सिंह पिता स्व. राजा ललित कुमार सिंह ने एक टुकड़ा 12073 वर्गफुट को स्नेहिल गुप्ता पिता संजय गुप्ता निवासी विधान नगर परगना वेस्ट बंगाल, दूसरा टुकड़ा 4386 वर्गफुट को विक्रम और तीसरा टुकड़ा 1,18,579 वर्गफुट को प्रमोद कुमार गुप्ता पिता ओमप्रकाश गुप्ता निवासी विधान नगर परगना को बेचा है।बताया जा रहा है कि यह भूमि स्व. ललित कुमार सिंह की मृत्यु के बाद रानी मंगलमोती के नाम हुई। उसके बाद विक्रम बहादुर सिंह के नाम पर आई। सवाल यह है कि राजपरिवार आदिवासी वर्ग से थे। मतलब विक्रम बहादुर आदिवासी हुए, लेकिन उनकी जमीन तीन गैर आदिवासियों के नाम पर कैसे रजिस्ट्री हो गई।रजिस्ट्री के साथ अनुमति संबंधी कोई नहीं लगाए गए। न ही पंजीयन विलेख में कियर अनुमति का जिक्र है। यह जमीन राजमहल से आगे जाने पर फिल्टर प्लांट के बाजू में दलदल की तरह है। बिना कलेक्टर की अनुमति के जमीनों को बेचा गया है।नजूल भूमि का कर निर्धारण हुए बिना ही जमीन बेची गई है। नजूल विभाग में 18-19 में प्रकरण दर्ज किया गया था। 3 सितंबर 2021 को आदेश के बाद शीट नंबर 56 प्लॉट नंबर 165 को मंगलमोती के नाम किया गया। इसके बाद 3 दिसंबर 2023 को मंगलमोती के निधन के बाद जमीन 29 दिसंबर 2023 को विक्रम बहादुर के नाम हुई। विक्रम बहादुर ने अब तीन टुकड़े गैर आदिवासियों को विक्रय कर दिए।कर निर्धारण कैसे हुआरजिस्ट्री के समय प्रस्तुत विक्रय विलेख में बताया गया है कि वर्ष 2018-19 में दर्ज प्रकरण का आदेश 3 दिसंबर 2021 को दिया गया। इसके बाद शीट नंबर 56, प्लॉट नंबर 165/3 नक्शा बटांकन करके रानी मंगलमोती के नाम पर कर निर्धारण किया गया। नजूल जमीनों को कर निर्धारण की प्रक्रिया संदेह इसलिए है क्योंकि यह लंबे समय से नहीं हुआ है।बाउंड्रीवॉल का निर्माण प्रारंभउक्त भूमि पर क्रेताओं ने बाउंड्रीवॉल का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। राजा महल के थोड़ी सी दूरी पर स्थित जमीन गहरी दलदलनुमा है लेकिन शहर के बीच में स्थित होने के कारण बेशकीमती है। कुल 1,35,038 वर्गफुट भूमि को 5.04 करोड़ रुपए में बेचा गया है। मतलब प्रति वर्गफुट 373 रुपए की दर तय की गई है। निगम सीमा के अंदर इतनी कम दर पर भूमि कहां मिलेगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular