Thursday, November 27, 2025
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किस अधिकारी के संरक्षण में पटवारी अनिल….

रायगढ़ ।  रायगढ़ जिला मुख्यालय के रायगढ़ तहसील अंतर्गत अनेक हल्का में पदस्थ रहने वाले पटवारी अनिल के कारनामो के कारण कई परिवार आज भी पटवारी एवं कालोनाइजरों को बददुआ देते होंगे। क्योंकि पटवारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी दूसरे की जमीन को किसी और के नाम पर चढ़ाने जैसे कई गलत कामों को अंजाम दिया है।

सूत्रों की माने तो रायगढ़ तहसील के हल्का में रहने के दौरान पटवारी अनिल ने बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है नाम न बताने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि जहां ईमानदारी से अगर कोई पटवारी काम करे तो उसके परिवार का भरण पोषण ही बड़े मुश्किल से हो पाता है लेकिन अनिल के पास तो करोड़ों की बेनामी संपत्ति की जानकारी मिल रही है।

अधिकारियों का संरक्षण….

नियमों पर अगर ध्यान दे तो कोई भी पटवारी जब किसी काम को अंजाम देता है तो उसके उच्च अधिकारी इस पर निगरानी बनाए रखते है जिससे किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो लेकिन अगर पटवारी अनिल को इतनी छूट दी गई कि वह कोटवारी भूमि का बिक्री नकल जारी कर दिया और उनके उच्च अधिकारियों को जानकारी न हो ऐसा शायद हो ही नहीं सकता इसलिए हम यह कह सकते है कि अनिल तो सिर्फ एक माध्यम है उच्च अधिकारियों तक कुछ दक्षिणा पहुंचाने का….

अधिकारी अपनी कलम बचाने में जुटे….

सूत्रों की माने तो राजस्व विभाग के अधिकारी अगर पटवारी अनिल पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही करते है तो कही ऐसा न हो कि जांच की आंच अधिकारियों तक भी पहुंचे और उसमें उनके हाथ जल जाए इसलिए इन मामलों में जब तक अति आवश्यक न हो तब तक टालने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिकारियों की सहमति से होता है अवैध काम

किसी भी पटवारी में इतना दम नहीं की वह बिना अधिकारी को अपने पक्ष में किए कोई भी अवैध काम को कर दे इसका मतलब साफ है कि अगर अनिल राम ने कोटवारी भूमि का बिक्री नकल जारी किया होगा तो इसकी सूचना अपने अधिकारियों को जरूर दिया होगा और अगर नहीं दिया गया है तो फिर जब कोटवारी भूमि का नामांतरण हुआ तो उस पर रोक क्यों नहीं लगी।

एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अनिल जिस हल्के में रहता है तो वहां उसके कालोनाइजर सहयोगी भी भारी मात्रा में जमीन की खरीदी कर लेते है और अनिल इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि कौन सी जमीन कोटवारी है और सड़क से लगी है जिसमें हेरफेर किया जा सकता है और फिर उसे अपने सहयोगियों के नाम पर कर दिया जाता है।

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