


रायगढ़ । यह शीर्षक पढ़ते ही पाठक चौंक से गये होंगे और सोच रहे होंगे हरियाणा के सोनीपत का रायगढ़ से भला क्या रिश्ता होगा। अगर आपको अपने जीवन में हरियाणा के सोनीपत जाने का अवसर मिला तो आप सोनीपत में निर्मित संविधान संग्रहालय को देखने जरूर जाये। भारतीय संविधान के इस संग्रहालय में प्रवेश करते ही आपको वहां रायगढ़ की मौजूदगी का एहसास भी होगा। दरअसल इस संग्रहालय में भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्यों की प्रतिमा स्थापित की गई है, साथ ही एक डिजीटल बोर्ड में संविधान सभा के सभी सदस्यों का संक्षिप्त परिचय उपलब्ध है। आपको यह जानकर गर्व होगा कि संविधान संग्रहालय में स्थापित संविधान सभा के सदस्यों की प्रतिमाओं में एक प्रतिमा रायगढ़ के किशोरी मोहन त्रिपाठी की भी है। किशोरी मोहन त्रिपाठी संविधान सभा में तत्कालीन मध्यप्रांत के देशी रियासतों का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके अलावे मध्यप्रदेश से और चार व्यक्ति भी अपने-अपने क्षेत्रों से संविधान सभा में मध्य प्रांत का प्रतिनिधित्व करते थे।
किशोरी मोहन त्रिपाठी संविधान सभा के ड्राफ्टिग कमेटी के सदस्य थे। उन्होंने संविधान सभा में अपने ओर से पंचायती राज, बालश्रमिक प्रतिबंधित और स्त्री शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपना अभिमत रखा था। जिसे भारतीय संविधान में यथोचित जगह दी गई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सोनीपत स्थित संविधान संग्रहालय में भारतीय संविधान की हस्त लिखित प्रतियों में से एक प्रति भी रखी गई है। यही नहीं संविधान सभा के सदस्यों का एक डिजीटल बोर्ड बनाया गया है जिसके अलग-अलग खानों में सदस्यों के नाम दर्ज हैं। अगर आप किसी भी सदस्य वाले खाने को दबाएंगे तो उस सदस्य का संक्षिप्त ऑडियो परिचय आपको सुनाई देगा। संविधान सभा का यह संग्रहालय देश के संविधान निर्माताओं की स्मृति का चिरस्थायी भवन है। यहां हर दिन हजारों की संख्या में लोग अपने देश के संविधान निर्माताओं की जानकारी लेने आते हैं।
अभी हाल छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत वर्ष में आयोजित राज्योत्सव समारोह में देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे। उन्होंने राज्योत्सव रजत समारोह के मंच से अपने उद्बोधन से छत्तीसगढ़ के जिन संविधान सभा सदस्यों का स्मरण किया था। उनमें रायगढ़ के किशोरी मोहन त्रिपाठी का नाम भी शामिल था। इससे पूर्व भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक जनसभा में किशोरी मोहन त्रिपाठी का उल्लेख किया था। विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति का स्मरण देश का प्रधानमंत्री करता है उसे उसके अपने शहर के लोगों ने तकरीबन विस्मृत सा कर दिया है। रायगढ़ में किशोरी मोहन त्रिपाठी जी के नाम पर सरकारी महिला महाविद्यालय का नामकरण जरूर किया गया है, लेकिन उसके अलावे किशोरी मोहन त्रिपाठी तकरीबन विस्मृत कर दिये गए है। न तो उस कॉलेज में जिसका नामकरण उनके नाम से किया गया है उनकी स्मृति में कुछ होता है और नहीं रायगढ़ शहर के लोग उन्हें याद करते हैं। यह स्थिति इसलिये भी दुर्भाग्यजनक है कि जिसे देश के प्रधानमंत्री याद रखते है उन्हें उन्हीं के शहर के लोग भूल चुके हैं।
किशोरी मोहन त्रिपाठी का जन्म ८ नवम्बर १९१२ को तत्कालीन सारंगढ़ रियासत के छोटे से गांव सरिया में हुआ था। उनके पिता बलभद्र त्रिपाठी को सारंगढ़ के राजा जवाहिर सिंह ओडि़सा के केवटेन पाली गांव से राजपरिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिये लेकर आये थे और उनके रहने के लिये सरिया में एक मकान और थोड़ी सी जमीन दी। तब किसी ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि एक निर्धन ब्राम्हण परिवार का बेटा देश के शीर्षस्थ संस्था संविधान सभा में अपनी जगह बना लेगा।
दरअसल संविधान सभा तक पहुंचने के पीछे किशोरी मोहन त्रिपाठी अपने छात्र जीवन से देश की आजादी को लेकर संजीदगी के साथ न केवल सोचते रहे बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों और देशी रियासतों के विलिनीकरण आंदोलन में भी सक्रियता से शामिल हुए थे। जिसका खामियाजा उन्हें नौकरी से इस्तीफा देकर तकरीबन एक वर्ष तक भूमिगत होकर भुगतना पड़ा था।
संविधान सभा की कार्रवाई पूरी होने के बाद १९५० से १९५२ तक भारत का प्रथम संसद में भी किशोरी मोहन त्रिपाठी को सदस्य के रूप में मनोनित किया गया था। इस लिहाज से वे रायगढ़ के प्रथम सांसद थे। आज जब पूरे देश में संविधान दिवस मनाया जा रहा है तब रायगढ़ जैसे पिछड़े क्षेत्र का संविधान सभा में प्रतिनिधित्व करने वाले किशोरी मोहन त्रिपाठी जी को याद रखना पार्टी और समाज का नैतिक दायित्व है। संविधान सभा के अध्यक्ष बाबा साहेब अंबेडकर ने कहा था जो पीढ़ी अपना इतिहास भूल जाती है वह भविष्य का निर्माण नहीं कर सकती ।
आशा त्रिपाठी

