रायगढ़। सहकारी समितियों में हो रही भारी गड़बड़ी के कारण कलेक्टर ने इस बार कड़े निर्णय लेने के संकेत दे दिए हैं। बताया जा रहा है कि दागी समितियों के प्रबंधकों को दूसरी समितियों में तबादला करने को कहा गया है। लेकिन अभी तक उप पंजीयक कार्यालय से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बीते तीन सालों में लैलूंगा, पुसौर, धरमजयगढ़, खरसिया और घरघोड़ा की कई सहकारी समितियों में भारी गड़बड़ी सामने आ चुकी है। जिले में करीब 20 समितियां ऐसी हैं जहां धान खरीदी और खाद वितरण में अनियमितता की गई है। इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती।
खरीदी खत्म होने के बाद बाहर से धान खरीदकर भरपाई कराई जाती है। इसे सरकार को भी भारी नुकसान होता है। समिति प्रबंधकों की मनमानी के कारण हर साल ऐसा होता है। इस साल प्रति एकड़ 20 क्विंटल की खरीदी की जाएगी। जाहिर सी बात है धान की अधिक मात्रा ली जाएगी। शॉर्टेज आने पर बाहर से खरीदने के लिए धान नहीं मिलेगा। इसलिए पहले ही गड़बड़ी को रोकने प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार की बायोमीट्रिक से खरीदी करने का आदेश भी है। इसलिए कलेक्टर ने दागी समितियों के प्रबंधकों को हटाने का आदेश दिया है। इनको दूसरी समितियों में ट्रांसफर करने को कहा गया है। डीआरसीएस को निर्देश दिए गए हैं लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
लैलूंगा और खरसिया समितियों में ज्यादा गड़बड़ी
धान खरीदी में लैलूंगा की समितियों ने गड़बड़ी के सारे रिकॉड तोड़ दिए हैं। इसलिए इस बार सबसे पहले वहां के प्रबंधकों को हटाया जाना है। लैलूंगा, राजपुर, लारीपानी समेत आधा दर्जन समितियों में गड़बड़ी है। खरसिया और पुसौर की समितियों का भी ऐसा ही हाल है। लैलूंगा समिति में तो दूसरी एफआईआर होनी है।
