Wednesday, January 21, 2026
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सवा दो एकड़ सरकारी भूमि को बेचा, अब शुरू हुई कार्रवाई

रायगढ़ । शहर के जगतपुर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर एक भू-माफिया ने पहले तो खुद कब्जा किया और फिर प्लाटिंग कर लोगों को विक्रय करने का खेल शुरू कर दिया। कागजों में कब्जा सौंपकर करीब सवा दो एकड़ सरकारी भूमि को बेच दिया। इसकी भनक लगने के बाद प्रशासन ने बुधवार को तोड़ू दस्ता के साथ पहुंची और वहां हुए निर्माण कार्यों को ढहा दिया। वहीं कुछ ऐसे मकान जहां लोगों ने रहना शुरू कर दिया था नोटिस जारी कर कब्जा खाली करने का कहा गया है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार जगतपुर क्षेत्र में खसरा नंबर 132/21और 142/2 जो की शासकीय दस्तावेजों में घास मद की भूमि है। इस भूमि को तथाकथित भू-माफियाओं ने कब्जा कर तकरीबन सवा दो एकड़ भूमि को टुकड़ों में बेच दिया था। जिससे कई खरीददारों ने उक्त भूमि पर निर्माण भी कर लिया था। साथ ही कई टुकड़ों पर अवैध निर्माण चल रहा था। ऐसे में मंगलवार को जिला प्रशासन को जानकारी मिली कि घास मद की भूमि पर सालों से निर्माण चल रहा, जिसमें कई मकान भी बन कर तैयार हो चुका है, जिससे बुधवार की सुबह घास मद की भूमि को अवैध निर्माण से मुक्त कराने के लिए एसडीएम प्रवीण तिवारी के नेतृत्व में तहसीलदार लोमश मिरी ने बुलडोजर लेकर पहुंच गए और चल रहे अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। साथ ही इस इसी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित भवन को भी हटाने के लिए निगम प्रशासन को पत्राचार किया गया है, ताकि जो भी भवन बन चुका है, उसे तत्काल हटाकर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त किया जा सके। लंबे समय से चल रहा था खेलवहीं बताया जा रहा है कि लंबे अर्से से इस क्षेत्र के दबंगों द्वारा उक्त घास मद की भूमि पर अवैध कब्जा कर खरीदी-बिक्री का खेल खेला जा रहा था, ऐसे में बुधवार को शासन द्वारा तोड़-फोड़ करने के बाद जो लोग उक्त भूमि की खरीदी कर भवन निर्माण कर लिए है, उनकी चिंताएं बढ़ गई है। ऐसे में लाखों रुपए खर्च कर खरीदी करने वाले लोग परेशान होने लगे हैं। यह भूमि पूर्व में कोटवारी भूमि के रूप में दर्ज थी, जो बाद में शासन में निहीत होने के बाद राजस्व रिकार्ड में घास मद के रूप में दर्ज हो गई। भू-माफिया इसी का लाभ उठाते हुए पहले तो इस भूमि में कब्जा किए और फिर जब प्रशासन की नजर में नहीं आया तो टुकड़ों में विक्रय करने का खेल शुरू कर दिया गया। पर्दे के पीछे आखिर कौनइस मामले की भनक लगने के बाद बुधवार को जब राजस्व विभाग की टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची तो जिस मकान का निर्माण पूरा हो चुका था जहां लोग रह रहे थे वहीं सामने दिखे, इसके अलावा वहां कोई नजर नहीं आया। आश्चर्य की बात तो यह है कि कोई न तो यह बता रहा है कि किससे भूमि की खरीदी की गई है और न ही कोई यह बता रहा है कि इस पूरे खेल के पीछे किसका हाथ है।

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