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33 केव्ही हाईवोल्टेज तारों के बीच बसी “सन सिटी” कॉलोनी पर सवाल, धड़ल्ले से बेचे जा रहा है प्लॉट.. आखिर परमिशन कैसे मिला?

रायगढ़ शहर के Sun City कॉलोनी में प्लॉट लेने से पहले सोच ले 

रायगढ़। शहर में तेजी से विकसित हो रही “सन सिटी” कॉलोनी अब चर्चा का विषय बन गई है। कारण – कॉलोनी का एक बड़ा हिस्सा 33 केव्ही हाई वोल्टेज बिजली तारों के नीचे और आसपास स्थित बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसी जगह पर आखिर कॉलोनी की अनुमति कैसे दी गई।

हाई वोल्टेज तारों के बीच बसी कॉलोनी…..

बताया जा रहा है कि “सन सिटी” के चारों ओर हाईवोल्टेज लाइनें गुज़री हुई हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के इलाकों में निर्माण कार्य के दौरान बिजली सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना आवश्यक होता है। बरसात के मौसम में इस तरह की जगहों पर बिजली से संबंधित खतरा और बढ़ सकता है।

परमिशन पर उठ रहे सवाल…..

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के कोतरा रोड थाना के पुराना रेलवे फाटक के पास , “सन सिटी” नामक कॉलोनी के केवल एक हिस्से को ही अनुमति (रेरा परमिशन) प्राप्त है। बताया गया है कि जिस हिस्से पर रेरा की मंजूरी है, उसके लेफ्ट साइड का विकास अधिकृत है, जबकि राइट साइड का निर्माण कार्य बिना स्पष्ट अनुमति के जारी बताया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसा है, तो जांच होनी चाहिए कि एक ही परमिशन के तहत दोनों ओर का विकास कैसे हो रहा है।

रेलवे लाइन से सटा इलाका भी चिंता का विषय….

जानकारी के अनुसार, यह कॉलोनी रेलवे लाइन के समीप भी है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि रेलवे सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए यहाँ निर्माण की अनुमति किन शर्तों पर दी गई। यदि फिर भी आप यहां प्लॉट लेकर मकान बनाना चाह रहे हैं तो नीचे हम आपको कुछ तकनीकी जानकारी दे रहे हैं जिससे आपको यह निर्णय लेने में आसानी होगी कि की इस कॉलोनी में प्लॉट खरीदना लाभदायक रहेगा या नहीं?

संभावित खतरे और प्रभाव….

जान-माल की सुरक्षा पर खतरा

33 केव्ही या उससे अधिक क्षमता वाले हाई टेंशन तारों से गुजरते करंट के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है।

बारिश या तूफान में करंट धरती तक आने की संभावना रहती है।

तार टूटने या झूलने की स्थिति में जानलेवा दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

निर्माण कार्य के दौरान लोहे की छड़, सीढ़ी या मशीनरी के संपर्क से भी करंट लग सकता है।

स्वास्थ्य पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक असर….

हाई टेंशन लाइनों से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें (EMF) लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। कई अध्ययनों में इसे नींद की समस्या, तनाव, सिरदर्द और बच्चों में ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) जैसे जोखिमों से जोड़ा गया है, हालांकि भारत में इस पर स्पष्ट मानक तय नहीं हैं।

संपत्ति का मूल्य घटता है…

ऐसे क्षेत्रों में बने घरों की बाजार वैल्यू सामान्य इलाकों की तुलना में कम रहती है। खरीदार आमतौर पर हाई टेंशन वायर के नीचे या नज़दीक घर खरीदने से बचते हैं। बैंक और वित्तीय संस्थान भी ऐसे प्लॉट पर लोन देने में संकोच करते हैं।

कानूनी और बीमा संबंधी जटिलता….

यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है, तो बीमा कंपनियां नुकसान की भरपाई से इनकार कर सकती हैं क्योंकि तकनीकी रूप से यह क्षेत्र “प्रतिबंधित निर्माण क्षेत्र” (Restricted Zone) में आता है। रेरा या विद्युत सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।

मानसून के मौसम में खतरा कई गुना बढ़ता है….

बारिश और बिजली गिरने के समय हाई टेंशन तारों से स्पार्किंग, आर्किंग और करंट लीकेज जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इससे आस-पास बने घरों और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों की सलाह….

बिजली सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हाई टेंशन लाइन से कम से कम 15 से 20 मीटर तक का खुला क्षेत्र (सेफ्टी कॉरिडोर) छोड़ा जाना चाहिए। इस दायरे में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण, लोहे की संरचना या पानी की टंकी बनाना खतरनाक माना जाता है।

प्रशासनिक जांच की अपेक्षा….

स्थानीय नागरिकों और जानकारों का मानना है कि नगर एवं विकास विभाग को इस पूरे प्रकरण की जांच करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कॉलोनी के किन हिस्सों को वैध अनुमति प्राप्त है और किन्हें नहीं। फिलहाल इस विषय पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

60 रुपए लीटर में भी मिल रहा घटिया दूध: उत्पादन से ज्यादा खपत! कौन बेच रहा है मिलावटी और सिंथेटिक दूध..?

जानिए क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े और हमारी ग्राउंड रिपोर्ट..
रायगढ़। रायगढ़ जिले में पिछले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस सफ्ताह पर 22 सितंबर से दूध का मूल्य ₹60 प्रति लीटर हो गया। दुग्ध उत्पादकों के स्वयंभू संगठन के द्वारा यह निर्णय लिया गया। दूध का मूल्य तो बढ़ गया मगर उसकी क्वालिटी और भी ज्यादा घटिया हो गई। एक्सपर्ट बताते हैं कि इस समय रायगढ़ में दूध में भारी मात्रा में मिलावट केसाथ साथ सिंथेटिक दुग्ध भी काफी मात्रा में बिक रहा है।

सिर्फ 15% गायों पर ही दूध का दारमदार
भारत सरकार की एक संस्था नाबार्ड द्वारा जारी पिछली रिपोर्ट के अनुसार “धरमजयगढ़ लैलूंगा घरघोड़ा, तमनार, रायगढ़, पुसौर, खरसिया और सारंगढ़ बरमकेला ब्लॉक मिलकर देसी गाय 4,74,580, हाइब्रिड गाय 1,06,690 और देशी भैंस 47,688 है। दुग्ध उत्पादन में देशी गाय 75% और हाइब्रिड गाय 15% है। देसी गाय का प्रतिदिन उत्पादन लगभग 1 लीटर से भी कम है। किसान देशी गाय का पालन मुख्यत: गोबर खाद और देशी नर बेल के लिए करते हैं।”

रिपोर्ट्स की माने तो भले देसी गाय संख्या में ज्यादा हो लेकिन दुग्ध उत्पादन और शहरी क्षेत्र में वितरण के लिए पूरा दारोमदार हाइब्रिड नस्ल की गाय पर है। जिसकी पूरी संख्या का मात्रा 15% है।
माध्यम से ऋण प्रदान करने की आवश्यकता है.”

इन रिपोर्ट्स की माने तो इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ” रायगढ़ जिले में बाहरी लोगों बड़ी संख्या में है। इसलिए दूध की आपूर्ति मांग के अनुपात नहीं हो पाती।”

तो ऐसे में सवाल यह है कि जब दूध की उत्पादन रायगढ़ जिले में उतनी है नहीं, जितनी खपत है, रिपोर्ट यह भी बताती है कि शहरी क्षेत्र मात्र 58 दुग्ध इकाई और ग्रामीण क्षेत्र में मात्र 415 दुग्ध व्यवसायी है। सरकार के पास सिर्फ 20,000 लीटर प्रतिदिन रोजाना दूध संकलन का रिकॉर्ड है और पूरे जिले भर में खपत करीब एक से डेढ़ लाख लीटर से ज्यादा है। तो ऐसे में बाकी का दूध आ रहा है तो कहां से आ रहा है..? इसकी जांच जिला प्रशासन को करनी चाहिए..!

तीन से चार घंटे में हो जाता है बड़ा खेल
दूध के बढ़े हुए दर की छानबीन करने के लिए करने के लिए जब हमने गांव का रुख किया तो पता चला कि, यहां पर जो असली दूध उत्पादन करते हैं, उनसे 30 से 35 रुपए लीटर में बिचौलिए दूध खरीद करते हैं और बाजार में यही दूध ₹60 लीटर में बेचा जाता है। जबकि इस दूध का पाश्चरीकरण का कोई प्रक्रिया नहीं किया जाता जैसे की सरकारी दुग्ध संस्थाओं द्वारा किया जाता है। मात्र 3 घंटे में यही दूध मिलावट के साथ डबल होकर ₹60 में बिकता है।

अब नहीं तो कब..
जिला प्रशासन को एक जांच दल बनाकर  बिचौलियों और नकली दुग्ध उत्पादकों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए। तभी दूध का दूध, पानी का पानी करना संभव है। नहीं तो वक्त के साथ यह सिंडिकेट और भी फलेगा फूलेगा, और इसका भारी नुकसान उठाने के लिए हम सभी को तैयार रहना चाहिए।

एनटीपीसी लारा में मनाया जा रहा है सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025



रायगढ़ । कर्मचारीयों को देश हित में सत्यनिष्ठा एवं ईमानदारी के साथ कार्य करने के लिए जागरूक करते हुए एनटीपीसी लारा में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है “सतर्कता: हमारी साझा ज़िम्मेदारी” है। इस थीम की तात्पर्य को लोगों में बताने तथा इस पर कार्य करने के लिए लोगो में जनजागरण पैदा करना इसका उद्देश्य है।

इस सप्ताह की शुरुआत एनटीपीसी लारा के मुख्य महाप्रबंधक (परियोजना) श्री रविशंकर द्वारा श्री केसीएस रॉय, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं प्रबंधन) और श्री हेमंत पावगी, महाप्रबंधक (औद्योगिक) की उपस्थिति में, विभागाध्यक्षगण, कर्मचारियों और यूनियनों व एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर सभी ने  सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करने के लिए शपथ लिया।

यह सप्ताह संगठन को सतर्क रहने और एक सत्यनिष्ठा-संचालित प्रणाली को बनाए रखने तथा सभी स्तरों पर एक पेशेवर और नैतिक संस्कृति को बढ़ावा देने की याद दिलाता है। इस अवसर पर बोलते हुए, श्री शंकर ने भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण के महत्व पर ज़ोर दिया और कर्मचारियों व सहयोगियों को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मूल मूल्यों के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस आयोजन के एक भाग के रूप में, सतर्कता विभाग द्वारा कर्मचारियों, सहयोगियों और आस-पास के सरकारी स्कूलों के स्कूली बच्चों के लिए विभिन्न जागरूकता सृजन गतिविधियाँ, प्रतियोगिताएँ, वार्ताएँ, नुक्कड़ नाटक आदि आयोजित किए जाएँगे।

एनटीपीसी लारा की ऐसी पहल न केवल कर्मचारियों, सहयोगियों और छात्रों के बीच सतर्कता जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि संगठन और समुदाय में ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिक आचरण की संस्कृति को पोषित करने में भी मदद करती है।

जितना भी कोई जोर लगा ले नहीं रुकेगा अडानी

विकास के नाम पर विनाश कर रही अडानी कंपनी, मुड़ागांव के बाद अब पुरुंगा में अडानी की पड़ी वक्र दृष्टि


रायगढ़। अडानी यह नाम सुनते ही लोग सिहर जाते हैं। क्योंकि रायगढ़ में जहां भी यह कंपनी जाती है विनाश ही करती है। पुसौर के बड़े भंडार हो या फिर तमनार का मुड़ागांव। जुलाई में तो इस नामी कंपनी का साथ तो जिला प्रशासन ने भी खूब दिया। तभी तमाम विरोधों के बाद अडानी अपनी खदान शुरू कर दिया। किस कीमत पर इससे कंपनी को कोई मतलब नहीं क्योंकि इसके आका यहां नहीं  किसी सुकून वाली जगह मौज से रहते हैं। इनके झांसे में आते हैं स्थानीय जो वर्तमान में चंद पैसे के लिए भविष्य से खेल जाते हैं।
पुरुंगा माइंस  के लिए भी अडानी के हौसले बुलंद है। कुछ दिन पहले जिला प्रशासन ने ग्रामीणों और कंपनी के बीच सुलह जैसी खबरें प्रकाशित की। पहली बार ऐसा देखा जा रहा है जब एक निजी कंपनी के लिए जिला प्रशासन नतमस्तक है। जबकि सच्चाई यह है कि माइंस को लेकर अभी भी गतिरोध बरकरार है। कंपनी के प्रलोभनों और ऊपर से आए दबाव के बीच नेता भले ही पीछे हट गए हों पर अपना सबकुछ दांव पर लगाने वाली जनता अड़ी है।

विदित हो कि पुरुंगा माइंस के लिए होने वाली जनसुनवाई पर अब भी हंगामा मचा हुआ है। स्थानीय नेताओं से अलग ग्रामीणों ने एकजुट होकर जनसुनवाई के विरोध में आवाज उठाई है। अंडरग्राउंड माइंस होने की वजह से इसके दुष्प्रभाव अलग तरह के हैं। ग्रामीणों तक सही जानकारी नहीं पहुंच रही है। पुरुंगा कोल ब्लॉक का आवंटन अडाणी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स को हुआ है। पुरुंगा कोल ब्लॉक में इसलिए अंडरग्राउंड माइनिंग किया जा रहा है क्योंकि स्ट्रिपिंग रेशियो बहुत ज्यादा है। ओपन कास्ट होता तो मुआवजे के अलावा खनन की लागत बहुत ज्यादा होती। 11 नवंबर को इसके लिए जनसुनवाई होनी है। इससे पहले ही ग्रामीण भूमिगत खदान से होने वाले नुकसान के चलते विरोध कर रहे हैं।

पहले इस कोल ब्लॉक का आवंटन छग नेचुरल रिसोर्सेस प्रालि कंपनी को किया गया था। बाद में स्वामित्व अंबुजा सीमेंट को ट्रांसफर किया गया है। छग नेचुरल रिसोर्सेस से अंबुजा सीमेंट को ओनरशिप ट्रांसफर की गई है। छाल तहसील के कोकदार, तेंदुमुड़ी, पुरुंगा और समरसिंघा गांव की 870 हेक्टेयर भूमि इस माइंस के लिए अधिग्रहित की जानी है। सालाना 2.25 मिलियन टन कोयला उत्पादन होना है। चार गांवों में 869 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। इसमें से 621.33 हे. वन भूमि, 26.89 हे. शासकीय भूमि और 220 हे. निजी भूमि है। चारों गांवों में छोटे-छोटे तालाब, बोरवेल आदि हैं। बीच में प्रशासन की मध्यस्थता से आपस में बातचीत हुई लेकिन आंदोलन दोबारा खड़ा हो गया है। गांवों में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। ग्रामीणों की जमीन इससे प्रभावित नहीं हो रही है। अंडरग्राउंड माइंस के ग्रेट के पास कुछ जमीन ली जाएगी। मुआवजा का प्रावधान भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि भूजल स्रोत और पीएमजीएसवास सडक़ बर्बाद हो जाएगी।

हर माइंस का हो रहा विरोध
किसी भी व्यक्ति को उसकी जड़ों से, उसकी पैतृक संपत्ति, पैतृक आवास से बेदखल किया जाए तो विरोध स्वाभाविक है। रायगढ़ जिले में किसी भी कंपनी ने अपने कार्यों से जनता के बीच भरोसा नहीं जगाया है। यही कारण है कि अब किसी भी कंपनी पर लोग भरोसा नहीं कर रहे हैं। वेदांता, जेएसपीएल, जेपीएल, अंबुजा सबकी कोल माइंस का विरोध हो रहा है।

अडानी ने की लोकतंत्र की हत्या
किसी का विरोध करने की जितनी व्यवस्था लोकतंत्र ने दी है उसी आधार पर प्रभावित गांव के लोग चल रहे हैं। लेकिन अडानी कंपनी ने शुरू से ही दमनात्मक रवैया अपनाया। मुड़ागांव के ग्रामीणों ने जब बताया कि जंगल काटने के लिए ग्राम सभा हुई ही नहीं है तो कंपनी फर्जी ग्राम सभा का दस्तावेज तैयार किया। ग्रामीण कटाई और मुआवजा के लिए नहीं माने तो अडानी के गुर्गे ग्रामीण बनकर कंपनी का सर्मथन करने संबंधित विभाग पहुंच गए। जिन-जिन बड़े लोगों ने विरोध किया उसे अपने हिसाब से सेट कर लिया। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने विरोध का दिखावा किया और अडानी कंपनी ने उन्हें साट कर कईयों को साटने का भी कार्य किया। कंपनी के विरोध में मामले चल रहे हैं पर कंपनी ही लोकतंत्र की हत्या कर मनमानी में व्यस्त है। यही पैटर्न अब अडानी के गुर्गे पुरुंगा में अपना रहे हैं।

अवैध चिरान के लिए घर में लगा दी आरा मिल


वन अमले की दबिश से हुआ खुलासा, मशीन जब्त कर अवैध चिरान को किया बरामद

रायगढ़। जिले के रेंगालपाली सर्किल में फर्जी आरा मिल का संचालन किया जा रहा था। एक युवक अपने घर में लकडिय़ों की अवैध चिराई कर रहा था। सूचना मिलने पर वन अमले ने मौके पर दबिश देकर मशीन को उखाडक़र जब्त कर लिया और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात वन विभाग को सूचना मिली कि रेंगालपाली सर्किल के ग्राम बरपाली के डीपापारा में फर्जी आरा मिल चल रही है। सूचना मिलते ही उडऩदस्ता समेत वन विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी। वहां पर अलग-अलग प्रजातियों की लकडिय़ां चिराई के लिए रखी हुई मिलीं। आरा मिल संचालक जगदीश बसंत से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन वह कोई कागजात नहीं दिखा सका और टालमटोल करने लगा। इससे स्पष्ट हुआ कि आरा मिल फर्जी तरीके से संचालित की जा रही थी।
मशीन को उखाडक़र जब्त किया
वन अमले ने लकड़ी चिराई की मशीन को उखाडक़र जब्त कर लिया है। मौके से विभिन्न प्रजातियों की लकडियां भी बरामद की गईं, जिनका मूल्यांकन किया जाएगा। फिलहाल, आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।
जांच की जा रही है- रेंजर
रेंजर हेमलाल जयसवाल ने बताया कि सूचना मिलने पर तत्काल जांच की गई। मौके पर आरा मिल से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। लकडियां भी बरामद की गई हैं, जिनका आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अवैध आरा मिलों और लकड़ी कटाई पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और कार्रवाई जारी रहेगी।

सोशल मीडिया पर एसडीएम पर टिप्पणी पड़ी भारी
भाजयुमो नेता गिरफ्तार कर भेजा गया रिमांड पर

रायगढ़। घरघोड़ा में सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी ने प्रशासन और राजनीति के बीच नई तनातनी खड़ी कर दी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेता अजीत गुप्ता को शुक्रवार देर रात पुलिस ने धारा 151 के तहत हिरासत में लेकर रिमांड पर भेज दिया।
जानकारी के अनुसार अजीत गुप्ता जो एनटीपीसी परियोजना के विरोध को लेकर लंबे समय से चर्चाओं में रहे हैं, ने अपने फेसबुक अकाउंट से घरघोड़ा एसडीएम दुर्गा प्रसाद अधिकारी (आईएएस) के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी। पोस्ट को प्रशासनिक गरिमा के विपरीत मानते हुए पुलिस ने एसडीएम कार्यालय के निर्देश पर कार्रवाई की।
शुक्रवार रात करीब 11 बजे घरघोड़ा पुलिस ने गुप्ता को एसडीएम कार्यालय में प्रस्तुत किया, जहाँ मुलाइजा (मेडिकल जांच) के बाद उन्हें शांति भंग की आशंका के तहत धारा 151 में रिमांड पर भेजा गया।प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी को लेकर अब सख्त रुख अपनाया गया है। अधिकारियों का कहना है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि कोई व्यक्ति कानून या मर्यादा की सीमाओं को लांघे। फिलहाल, गुप्ता को न्यायिक प्रक्रिया के तहत एसडीएम के समक्ष पेश किया गया है और रिमांड पर भेज दिया गया है।

एन.आर.व्ही.एस. प्लांट के फर्नेस में धमाका, तीन श्रमिक झुलसे, एक की हालत नाजुक

रायगढ़ । रायगढ़-घरघोड़ा मुख्यमार्ग में पड़ने वाले ग्राम तराईमाल स्थित एन.आर.व्ही.एस. कंपनी में शुक्रवार सुबह एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना में प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस में हुए जोरदार धमाके में तीन मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों में से एक की हालत नाजुक होने पर उसे रायपुर रेफर किया गया है, जबकि दो अन्य का इलाज जिंदल फोर्टिस अस्पताल में जारी है।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एन.आर.व्ही.एस. में शुक्रवार सुबह लगभग 7 बजे प्लांट के स्टील मेल्टिंग शॉप सेक्शन में अचानक तेज धमाका हुआ और पूरे परिसर में घना धुआं फैल गया। इस विस्फोट की चपेट में आकर तीन मजदूर बुरी तरह झुलस गए। घटना के बाद प्लांट में मौजूद अन्य मजदूरों के बीच अफरा-तफरी मच गयी। आनन-फानन में तीनों घायल मजदूरों को तत्काल ले जाया गया, जहाँ झुलसे श्रमिकों में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी रामनारायण यादव की स्थिति काफी गंभीर होने पर प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर कर दिया है। वहीं, दो अन्य मजदूरों का इलाज अस्पताल में जारी है।


उल्लेखनीय है कि पूँजीपथरा थाना क्षेत्र में दर्जनों उद्योग स्थापित हैं, जहाँ आये दिन इस तरह की भयानक दुर्घटनायें होना आम बात हो गयी हैं। सोचने वाली बात है कि औद्योगिक दुर्घटनाओं में केवल श्रमिकों की ही जानें जाती हैं। कोई ऊँचाई से गिर कर मौत के मुँह में जा रहा है तो कोई धधकती भट्ठी में भस्म होने को विवश है। सवाल उठता है कि आये दिन हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए कंपनी प्रबंधन मजदूरों के सुरक्षा के पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं करते? औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग के जाँच में कई बार कंपनी प्रबंधनों की लापरवाही सामने आयी है। यह कैसी विडम्बना है कि कंपनियों द्वारा सुरक्षा उपायों में होने वाले खर्च को बचाने के फेर में श्रमिकों की जान को दाँव पर लगा देते हैं और जब हादसे में किसी की जान चली जाती है तो उससे कहीं ज्यादा मुआवजा में देना पड़ जाता है।




फिलहाल, पूंजीपथरा पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके। बार-बार हो रहे औद्योगिक हादसों और मजदूरों की अकाल मौतों पर सम्बंधित अधिकारियों को न केवल ठोस कदम उठाये जाने की जरुरत है, बल्कि दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की आवश्यकता है।

अडानी की बड़ी परेशानी  : पुरंगा कोल ब्लॉक जनसुनवाई रद्द करने ग्रामीण के किया कलेक्ट्रेट का घेराव

पेशा कानून के तहत ग्रामीणों ने मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड पुरुंगा अडानी की जनसुनवाई को पहले ही किया किया निरस्त

रायगढ़ । पुरंगा कोल ब्लॉक में अडानी को दिए गए कोल ब्लॉक कि जनसुनवाई रद्द करने की मांग को लेकर आज सैकड़ों ग्रामीण जल, जंगल, जमीन, पशु को बचाने के लिए हाथों में तख्ती लेकर नारेबाजी करते हुए रैली निकाल कर रायगढ़ कलेक्टर ऑफिस पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी करते हुए ग्रामीणों द्वारा गेट खोलो गेट खोलो के नारे लगाए। वहीं ग्रामीणों की मांग है कि जिला कलेक्टर ग्रामीणों से चर्चा करते हुए उनकी मांग को सुने।
विदित हो कि रायगढ़ जिले के धर्मजगढ क्षेत्र में अदानी के कोल ब्लॉक की जनसुनवाई 11 नवंबर को प्रस्तावित है जिसका की प्रभावित गांवों के ग्रामीणों द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है, स्पष्ट उनका कहना है कि इस कोल माइन्स के खुल जाने से हमारे जमीन और जंगल के साथ ही पशुओं का भी सत्यानाश हो जाएगा और वह जनसुनवाई को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत तेन्दुमुड़ी में नीति शनिवार को आयोजित पेशा कानून के तहत विशेष ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड, पुरुंगा (अडानी ग्रुप) की प्रस्तावित भूमिगत कोयला खदान परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित करते हुए आगामी 11 नवंबर को निर्धारित पर्यावरणीय जनसुनवाई को निरस्त करने का निर्णय लिया। ग्राम सभा को प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा 869.025 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 2.25 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की उत्पादन क्षमता वाली भूमिगत कोयला खदान का प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्तावित क्षेत्र में 621.331 हेक्टेयर वन भूमि, 26.898 हेक्टेयर गैर-वन भूमि, एवं 220.796 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है।
यह खदान ग्राम पंचायत तेन्दुमुड़ी, पुरुंगा और साम्हरसिंघा के क्षेत्र को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगी।ग्राम सभा की आपत्तियाँग्रामवासियों ने अपने प्रस्ताव में कहा कि—वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत ग्राम के निजी दावे अभी लंबित हैं, ऐसे में बिना स्वीकृति किसी भी परियोजना की कार्यवाही गैरकानूनी है।

घना जंगल और हाथियों का प्राकृतिक आवास

क्षेत्र पेशा कानून के अंतर्गत आता है, और ग्राम सभा ने इस परियोजना को स्वीकृति नहीं दी है। यह क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची में शामिल है तथा छत्तीसगढ़ पेशा अधिनियम 2022 के तहत संरक्षित है। प्रस्तावित खनन क्षेत्र में कोकदार आरक्षित वन क्षेत्र आता है, जो अत्यंत घना जंगल है और हाथियों का प्राकृतिक आवास है।ग्रामवासियों ने चिंता व्यक्त की कि भूमिगत खनन से विशाल गड्ढों में जल भराव होगा, जिससे आस-पास के नदी-नालों के जल स्रोत सूख सकते हैं, और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।धरमजयगढ़ वनमंडल में अब तक 167 ग्रामीणों की मृत्यु हाथियों के हमलों में और 68 हाथियों की मौत दर्ज की जा चुकी है। वहीं छाल रेंज में 54 ग्रामीणों और 31 हाथियों की मौत हुई है। ग्रामीणों ने चेताया कि खनन शुरू होने से जंगली हाथियों के विचरण क्षेत्र में बाधा, ध्वनि और वायु प्रदूषण, तथा ग्रामवासियों की जान-माल को खतरा बढ़ जाएगा।

ग्राम सभा ने किया पुरजोर विरोध

ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से लिया निर्णय पेशा कानून की मान्यता को ध्यान में रखते हुए ग्राम तेन्दुमुड़ी, मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान (869.025 हेक्टेयर एवं 2.25 MTPA क्षमता) परियोजना का विरोध करती है और इस परियोजना से संबंधित 11 नवंबर 2025 की पर्यावरणीय जनसुनवाई को निरस्त करती है।
ग्राम सभा ने प्रशासन एवं कंपनी को चेतावनी दी कि ग्राम क्षेत्र में खनन के समर्थन में किसी भी प्रकार की गतिविधि करना सख्त रूप से प्रतिबंधित रहेगा।अब देखना यह होगा कि पेशा कानून के तहत पारित इस विशेष ग्राम सभा के निर्णय के बाद प्रशासन जनसुनवाई को निरस्त करता है या विरोध के बीच सुनवाई आयोजित करता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

छोटी दिवाली 2025: जानें नरक चतुर्दशी पर यम का दीपक जलाने और अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 19 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है। यह पर्व दीर्घायु, सौंदर्य और स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक माना जाता है। इस दिन आयु के देवता यमराज की पूजा का विशेष महत्व होता है, वहीं भगवान कृष्ण की भी आराधना की जाती है, क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर नरक चतुर्दशी आती है। इस वर्ष यह तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 01:51 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर दोपहर 03:44 बजे तक रहेगी। इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में यम का दीपक जलाने का विशेष महत्व है, जिससे अकाल मृत्यु का भय कम होता है।

यम का दीपक और अभ्यंग स्नान का शुभ समय
इस वर्ष नरक चतुर्दशी पर यम का दीपक और अभ्यंग स्नान दो अलग-अलग समय पर किया जाएगा:

यम का दीपक: 19 अक्टूबर, शाम 05:50 बजे से शाम 07:02 बजे तक
अभ्यंग स्नान: 20 अक्टूबर, सुबह 05:13 बजे से सुबह 06:25 बजे तक
रूप चौदस क्यों कहा जाता है?
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन तेल मालिश और स्नान करने से तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है। सुबह या शाम के समय उबटन के साथ स्नान करना उत्तम माना जाता है। इसके बाद दीपक जलाने से सौंदर्य और स्वास्थ्य में भी लाभ होता है।

दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए उपाय
नरक चतुर्दशी पर लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इस दिन मुख्य द्वार पर बाईं ओर अनाज की छोटी ढेरी रखकर, उस पर सरसों के तेल का एकमुखी दीपक जलाएं। दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद दीपक के पास जल और पुष्प चढ़ाकर लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

कर्ज मुक्ति के लिए उपाय
यदि आप अपने कर्ज से मुक्ति चाहते हैं, तो नरक चतुर्दशी पर बजरंगबली के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद मंत्र “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हूँ फट” का जाप करें। मंत्र जाप के बाद हनुमान जी से कर्ज मुक्ति और आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना करें।

शहर के प्रतिष्ठित कंपनी बाँके बिहारी के निदेशकों के बीच गहराया विवाद का संकट

रायगढ़ । पूँजीपथरा थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थापित बाँके बिहारी पावर एंड स्टील लिमिटेड तथा बाँके बिहारी इन्फ्राकाम प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक विवाद में कंपनी के निदेशक हरविलास अग्रवाल और उनके पुत्र पर हमला होने का मामला सामने आया है। विदित हो कि घटना 17 अगस्त 2025 को तेलीबांधा स्थित सृष्टि गार्डन (मकान नं. 11,12) में आयोजित की गई मीटिंग के दौरान हुई।

घटना के संबंध में हरविलास की मानें तो कंपनी के कुछ सदस्यों ने 17 अगस्त को बिना शेयरहोल्डर्स के सहमति व जरूरी दस्तावेजों के बैठक बुलाई गयी थी मीटिंग बुला ली। हरविलास और उनके पुत्र आयुष अग्रवाल उक्त बैठक में विरोध करने गए तो मयंक अग्रवाल, प्रतीक अग्रवाल, पवन अग्रवाल, सन्नी अग्रवाल व अन्य उपस्थित लोगों ने उन्हें दरवाजा बंद कर उनसे दबाव पूर्वक सादे कागज व दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा, जिसका विरोध करने पर उन लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और दोनों पिता-पुत्र के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि पवन अग्रवाल ने आयुष के पैरों पर दांतों से काटने की कोशिश की, जिससे आयुष के सिर व पैरों में चोटें आईं। दोनों का इलाज जिला अस्पताल पंडरी व रायगढ़ के अस्पतालों में किया गया। हरविलास ने बताया कि उन्होंने हमें जान से मारने की धमकी दी, यदि हम बाहर नहीं निकलते तो हमारी जान भी जा सकती थी। घटना के समय ड्राइवर श्रवण सिदार तथा आसपास के लोग भी मौजूद थे।


घटना की रिपोर्ट पीड़ित पक्ष ने 20 अगस्त 2025 को कोतरा थाना (रायगढ़) में दर्ज करवाई। शिकायत में आरोपियों के नाम और घटना के क्रम का ब्योरा दिया गया है। शिकायत में कंपनी के पंजीकृत कार्यालय (रायपुर, सृष्टि गार्डन मकान नंबर 11-12) और दोनों कंपनियों के निदेशकों हरविलास अग्रवाल, सन्नी अग्रवाल, पवन अग्रवाल आदि का नाम उल्लेखित है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ निदेशकों द्वारा बिना उचित कार्यवाही के और शेयरहोल्डर्स के अधिकारों की अनदेखी कर नियुक्तियाँ की जा रही थीं, जिसका विरोध किया गया था।
बहरहाल, पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और जाँच के बाद ही पता चल पायेगा कि शहर के एक प्रतिष्ठित कंपनी के अंदरूनी विवाद का वास्तविक सच क्या है?